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पने पोस्ट के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव आयोग को मतदाता दिवस मनाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है
कोलकाता। राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि जिस दिन चुनाव आयोग मतदाता दिवस मना रहा है, उसी दिन वह लोगों के मतदान अधिकार छीनने में लगा हुआ है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और त्रासद है।
ममता बनर्जी ने अपने पोस्ट में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग “हिज़ मास्टर्स वॉयस” की तरह काम कर रहा है और नियमों व मानकों के अनुसार लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने के बजाय लोगों को परेशान करने के लिए “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” जैसे नए-नए बहाने खोज रहा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के बजाय चुनाव आयोग सत्तारूढ़ भाजपा के इशारे पर विपक्ष को कुचलने और भारतीय लोकतंत्र की नींव को कमजोर करने में जुटा है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि चुनाव आयोग की कार्रवाइयों के कारण लोगों को अभूतपूर्व मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है और अब तक 130 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या 85, 90 या 95 वर्ष के बुजुर्गों और शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को भी अपनी पहचान साबित करने के लिए शारीरिक रूप से उपस्थित होने के लिए बुलाया जा सकता है। उनके अनुसार, इस तरह के दबाव और तनाव के चलते आत्महत्याओं और मौतों की घटनाएं बढ़ रही हैं।
ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की मौजूदा प्रक्रिया नागरिकों के लिए एनआरसी जैसी परीक्षा बनती जा रही है, जिसका असर विशेष रूप से अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव लोकतंत्र का उत्सव होते हैं, लेकिन चुनाव आयोग का पक्षपातपूर्ण रवैया, कथित अवैध एकतरफा फैसले और माइक्रो-ऑब्ज़र्वरों की तैनाती से लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
अपने पोस्ट के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव आयोग को मतदाता दिवस मनाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।